खुलासा: राहुल और हार्दिक के बीच समझौता, रोबर्ट वाड्रा से गुप्त वार्ता मे क्या क्या मिला

अबतक गुप्त हार्दिक पटेल रोबर्ट वाड्रा के बीच हुई मुलाकात की महेश बांभणीया ने पोल खोल दी।

लखनऊ : अनामत आंदोलन से नेता बने हार्दिक पटेल ने गुजरात चुनाव से पूर्व राहुल गांधी से तथा रोबर्ट वाड्रा से गुपचुप तरीके से की गई वार्ता का खुलासा होने से हार्दिक के सहयोगी और बड़ी संख्या में पाटीदार आक्रोशित हो गए।

कल ही हार्दिक का साथ छोड़कर अलग हुए दिनेश बांभणीया ने इस बात का खुलासा किया। आज रात्रि 8 बजे एक निजी टीवी चैनल के डिवेट प्रोग्राम में कांग्रेस कर अभय दुबे, भाजपा के सुधांशु त्रिवेदी,  Paas के निखिल सवानी, Pass के पूर्व सदस्य अश्विन पटेल व चिराग पटेल मौजूद थे।इस डिवेट मे हार्दिक पटेल से इस बारे में पूछा गया सवाल भी दिखाया गया जिसका हार्दिक ने सीधा जवाब न देकर यह कहा कि 10 दिन बाद इनकी वार्ता नवाज़ शरीफ़ से तथा दाऊद से होने की बात भी की जा सकती है। हार्दिक ने इस बात से इनकार भी नही किया कि उनसे वाड्रा की बात नही हुई। जवाब को टालते रहे।

 

टीवी चैनल के डिवेट में कांग्रेस प्रवक्ता जो इस बात में माहिर माने जाते है कि घिरे सवालों का सीधा उत्तर न देकर समय व्यर्थ करते है, डिवेट में कुछ ऐसा ही हुआ।  अभय दुबे वाड्रा के बचाओ में ही दिखाई दिये और इस बात से साफ इंकार  करते रहे कि हार्दिक और वाड्रा की कोई मुलाकात हुई। कांग्रेसी प्रवक्ता भाजपा पर निरर्थक आरोप ही लगाते रहे और प्रश्न कर यत्तार से बचते रहे।

भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने नेहरू गांधी परिवार के दामाद का नाम एयरपोर्ट के VVIP सूची में दर्ज होने का प्रश्न उठाया तो अभय दुबे, बिफर गये। चिराग पटेल और अश्विन पटेल ने डिवेट में इस बात का पूरा खुलासा कर दिया कि हार्दिक पटेल और वाड्रा की गुपचुप मुलाकात हुई थी जिसके प्रमाण उनके पास है। उन्होंने यह भी खुलासा कर दिया कि डिवेट में बैठे निखिल की संपत्ति वाड्रा से मुलाकात के बाद सचानक बाद गई।उनका यह भी आरोप था कि हार्दिक पटेल और उनके कुछ खास लोगो को भी वाड्रा से संपत्ति मिली है।

 

वाड्रा से संपत्ति मिलने से एक बात साफ हो गई कि पाटीदार को आरक्षण देने के मुद्दे की जगह युवा नेताओ ने अपनी संपत्ति बनाने के लिए कांग्रेस से समझौता किया है। पाटीदारों के साथ बहुत बड़ी गद्दारी की गई है। कांग्रेस ने इसी कारण अपने घोषणा पत्र में पाटीदारों को आरक्षण दिए जाने की कोई बात नही की और बावजूद इसके हार्दिक पटेल व उनके साथी राशूल का साथ दे रहे है और अपने पाटीदारों के साथ विश्वासघात कर रहे है।

 

पाटीदार आंदोलन के नाम पर पाटीदारों के मसीहा बने हार्दिक पटेल ने कांग्रेस से समझौता कर पाटीदारों के हित की बात न करके अपनी स्वार्थ सिद्धि की है।अब देखना यह है कि भाजपा का विरोध कर रहे पाटीदार अभी भी कांग्रेस का समर्थन करते है या पूर्व की भांति भाजपा का साथ देते है।

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